यौन उत्पीड़न मामला: हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह ने ‘रेप की कोशिश’ की धारा जोड़ने की मांग का विरोध किया
Sexual Harassment Case
चंडीगढ़: Sexual Harassment Case: हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों में संशोधन कर आईपीसी की धारा 376 (रेप का प्रयास) को धारा 511 के साथ जोड़ने और मामले को सत्र अदालत में विचारण के लिए भेजने की मांग का विरोध किया है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में संदीप सिंह की ओर से बचाव पक्ष ने जवाब दाखिल कर दिया। साथ ही अभियोजन पक्ष की अर्जी पर बहस भी हुई।
चीफ जूडिशल मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तिथि तय की है, जिसमें अर्जी पर निर्णय संभव है।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने पिछली सुनवाई के दौरान चीफ जूडिशल मजिस्ट्रेट की अदालत में यह अर्जी दायर की थी। अभियोजन पक्ष का तर्क है कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री, जिसमें पीड़िता का सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान और अदालत में दिया गया मुख्य परीक्षण (एग्जामिनेशन-इन-चीफ) शामिल है, आरोपी के खिलाफ स्पष्ट, सुसंगत और गंभीर आरोप दर्शाते हैं।
वहीं, संदीप सिंह की ओर से बचाव पक्ष के वकील ने इस अर्जी का विरोध करते हुए इसे कार्यवाही में देरी करने की रणनीति बताया और कहा कि पूर्व ओलंपियन को झूठा फंसाया गया है। उनका कहना है कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि वर्तमान मामले में आईपीसी की धारा 376 सहपठित धारा 511 के तहत अपराध बनता है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि शिकायतकर्ता ने अपनी प्रारंभिक पुलिस शिकायत, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई थी, में इस तरह के आरोपों का उल्लेख नहीं किया था।
वकील ने आगे कहा कि इसी तरह की एक अर्जी शिकायतकर्ता द्वारा पहले भी दायर की गई थी, जिसे 29 जुलाई 2024 को पूर्ववर्ती अदालत ने खारिज कर दिया था। इस आदेश को न तो शिकायतकर्ता और न ही राज्य ने सत्र अदालत में चुनौती दी, जिससे यह अंतिम रूप ले चुका है।
पुलिस ने 31 दिसंबर 2022 को एक पूर्व कोच की शिकायत पर पूर्व मंत्री के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 354, 354-ए, 354-बी, 342, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया था।
चंडीगढ़ पुलिस को दिए अपने बयान में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 1 जुलाई 2022 को मंत्री ने अपने सरकारी आवास पर उसके साथ छेड़छाड़ की, विरोध करने पर उसे धक्का दिया और उसकी टी-शर्ट फाड़ दी, जिसके बाद वह किसी तरह वहां से बचकर निकलने में सफल रही।
अभियोजन पक्ष की मांग:
अभियोजन पक्ष ने अदालत से आग्रह किया है कि मामले में ‘रेप की कोशिश’ की धारा जोड़ी जाए और इसे सत्र न्यायालय में विचारण के लिए भेजे जाने को लेकर दो अलग-अलग अर्जियां दायर की गई थीं। अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप तय में संशोधन की मांग के तहत आईपीसी की धारा 376/511 जोड़ने की बात कही गई है।
एग्जामिनेशन-इन-चीफ में पीड़िता अपने बयान पर कायम रही थी। माना गया कि इसी आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोप तय में संशोधन की अर्जी दायर की।
कोच का आरोप है कि मंत्री ने उन्हें अपने सरकारी आवास पर बुलाकर अनुचित व्यवहार किया। वहीं, संदीप सिंह ने शुरू से ही आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ट्रांसफर से नाराज होकर उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया।
एफआईआर में गलत तरीके से रोकने, छेड़छाड़, कपड़े फाड़ने, आपराधिक धमकी देने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से जुड़ी धाराएं लगाई गई थीं। इनमें से कुछ धाराएं जमानती हैं, जबकि धारा 354 और 354-बी गैर-जमानती श्रेणी में आती हैं।
पीड़िता की अर्जी पर मामला अतिरिक्त चीफ जूडिशल मजिस्ट्रेट की अदालत से चीफ जूडिशल मजिस्ट्रेट की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था।